जानिए अलंकार की परिभाषा, भेद और उदाहरण- Alankar in Hindi

Alankar In Hindi : हेलो मेरे प्यारे साथियों आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे Alankar In Hindi के बारे में अलंकार क्या होता है अलंकार की परिभाषा और अलंकार के भेद आज की इस पोस्ट में हम आपको अलंकार से जुड़ी हुई सारी जानकारी देंगे |

Alankar in Hindi

अलंकार की परिभाषा Alankar In Hindi

कविता का सौन्दर्य बढ़ाने वाले चमत्कार को ही अलंकार कहते हैं। अलंकार शब्द का साधारण अर्थ है ‘आभूषण’ या ‘गहने’ । जिस प्रकार आभूषण या गहने शरीर की सुन्दरता को बढ़ाते हैं, उसी प्रकार कविता की सुन्दरता को बढ़ाने का साधन अलंकार है। अलंकार कविता की शोभा में चार चाँद लगा देते हैं।

अलंकार का महत्त्व- कविता में अलंकारों का महत्त्व कुछ इस प्रकार है

1. अलंकारों से कविता की सुन्दरता बढ़ती है।

2. सुन्दरता बढ़ने से कविता का अधिक प्रभाव पड़ता है।

3. अलंकार की सहायता से कवि अपने भावों को सरलता तथा आकर्षक ढंग से प्रकट कर पाता है।

अलंकार के भेद

साहित्य अथवा कविता में शब्द और अर्थ दोनों महत्त्वपूर्ण होते हैं। कुछ अलंकार शब्दों के चमत्कार पर आधारित होते हैं तो कुछ अलंकार अर्थों के चमत्कार पर जैसे

‘रघुपति राघव राजा राम’-पंक्ति में ‘र’ वर्ण की आवृत्ति एक से अधिक बार होने के कारण यहाँ शब्दों में चमत्कार है।

एक अन्य उदाहरण देखिए

ऋतु दुलार की निकल गई

नयन ही आँजती रही उम्र की दुल्हन।

उपर्यक्त पंक्तियों में तैयारी करते रहने में सारा जीवन बीत जाने का ढंग से प्रकट हुआ है। अतः यहाँ शब्दों में नहीं अर्थ में चमत्कार है।

 अलंकारों के तीन भेद माने गए हैं

1. शब्दालंकार 2. अर्थालंकार 3. उभयालंकार

1. शब्दालंकार

जहाँ कविता किसी शब्द विशेष के कारण सुन्दर अर्थात हो तो वहाँ शब्दालंकार होता है। जैसे-काली घटा का घमण्ड घटा।

उपर्युक्त पंक्ति में ‘घटा’ शब्द का दो अलग-अलग अर्थों में प्रयोग हआ है उसकी आवृत्ति से पंक्ति में चमत्कार उत्पन्न हो गया है, अतः यहाँ शब्दालंकार है।

2. अर्थालंकार

जहाँ कविता की सुन्दरता और उसका प्रभाव किसी शब्द विशेष पर निर्भर नहीं होता, बल्कि उनसे प्राप्त अर्थ सुन्दर, चमत्कृत और प्रभावशाली होता है वहाँ अर्थालंकार होता है। जैसे

हनूमान की पूँछ में, लगन न पाई आग। लंका सगरी जल गई, गए निसाचर भाग।।

उपर्युक्त पंक्तियों में हनुमान की पूँछ में आग लगने से पहले ही लंका का जलना और राक्षसों का भाग जाना वर्णित है। अतः यहाँ अर्थ में चमत्कार होने के कारण अर्थालंकार है।

 3. उभयालंकार

जहाँ कविता में प्रयुक्त शब्द और अर्थ दोनों में सुन्दरता हो, वहाँ उभयालंकार होता है। जैसे

भावी-भारत-गौरव गढ़

इस पंक्ति में शब्दालंकार ‘अनुप्रास’ और अर्थालंकार ‘रूपक’ दोनों का प्रयोग है। अतः यहाँ उभयालंकार है।

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प्रमुख शब्दालंकार Alankar In Hindi

1. अनुप्रास अलंकार

परिभाषा- जहां एक पंक्ति में एक या अनेक वर्णों (अक्षरों) की एक या दो से अधिक आवृत्ति होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। जैसे

  1. कालिन्दी कूल कदंब की डारनि।
  2.  तरणि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।
  3. कूकै लगी कोइले कदंबन पै बैठि फेरि।

उपयुक्त उदाहरणों में 1. ‘क’, 2. ‘त’ तथा 3. ‘क’ वर्गों की बार-बार आवत्ति हुई

पंक्तियों का शब्द सौंदर्य बढ़ गया है। अस्तु, यहाँ अनुप्रास अलंकार

है। जिस कारण इन पंक्तियों का

2. यमक अलंकार

परिभाषा– जहाँ काव्य पंक्ति में एक ही शब्द दो अथवा दो से अधिक बार प्रयुक्त अर्थ में भिन्नता हो, वहाँ यमक अलंकार होता है। जैसे-

 नगन जड़ाती वे नगन जड़ाती हैं

पर्यस्त काव्य पंक्ति में ‘नगन’ तथा ‘जड़ाती’ शब्दों का भिन्न-भिन्न अर्थो में हआ है। पहले ‘नगन’ शब्द का अर्थ हीरे-मोती है तथा दूसरे ‘नगन’ का अर्थ नग्न बहीन है. इसी प्रकार पहले ‘जड़ाती’ शब्द का अर्थ जड़वाना है, परन्तु दूसरे ‘जडाती’ शब्द का अर्थ जाड़े में मरना (सर्दी में मरना) है। अस्तु यहाँ यमक अलंकार है।

अन्य उदाहरण हैं

(क) कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय।

वा खाये बौराय जग, या पाये बौराय।। उपर्यक्त दोहे में ‘कनक’ शब्द की दो बार आवृत्ति हुई है। प्रथम कनक का अर्थ धतूरा है और द्वितीय कनक शब्द का अर्थ है सोना (स्वण)। अस्तु, यहाँ यमक अलंकार

(ख) तीन बेर खाती, ते वे तीन बेर खाती हैं।

उक्त उदाहरण में ‘बेर’ शब्द का प्रयोग दो बार हुआ है किन्तु प्रत्येक बार ‘बेर’ शब्द का अर्थ भिन्न-भिन्न है। पहले ‘बेर’ का अर्थ बार-बार है जबकि दूसरे ‘बेर’ का अर्थ ‘फल-विशेष’ है। अस्तु, यहाँ यमक अलंकार है।

3. श्लेष अलंकार

परिभाषा- जहाँ एक शब्द का एक ही बार प्रयोग हो किन्तु उसके अर्थ अनेक निकलें, वहाँ श्लेष अलंकार होता है। जैसे

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानूस, चून।।

उपर्युक्त उदाहरण में पानी’ शब्द के अनेक अर्थ निकलते हैं-यहाँ ‘पानी’ का अर्थ चमक, सम्मान और जल के रूप में लिया गया है। अस्तु, यहाँ श्लेष अलंकार है।

अन्य उदाहरण

(क) रहिमन जो गति दीप की कुल कपूत गति सोय।

        बारे उजियारो लगे बढे अँधेरो होय।।

उपर्युक्त दोहे के बारे और बढ़े शब्दों में श्लेष अलंकार है।

(ख) मेरे मानस के मोती

यहाँ ‘मानस’ शब्द के दो अर्थ हैं-मन और मान सरोवर। अतः यहाँ श्लेष अलंकार है।

प्रमुख अर्थालंकार Alankar In Hindi

1. उपमा अलंकार

परिभाषा‘उपमा’ का शाब्दिक अर्थ है-‘तुलना’ । जहाँ एक वस्तु अथवा प्राणी की तुलना अत्यन्त सादृश्य के कारण प्रसिद्ध वस्तु अथवा प्राणी से की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है। जैसे-

नीलिमा लतिका-सी तन्वंगी है

यहाँ नीलिमा के इकहरे और उसके आकर्षक भंगिमापूर्ण शरीर की तुलना अपने इकहरेपन और लहरीपन के लिए प्रसिद्ध लतिका (बेल) के साथ की गई है। अतः यहाँ उपमा अलंकार है

उपमा के चार तत्व है

  1.  उपमेंय  2. उपमान  3. सामान्य धर्म  4. वाचक शब्द

(क) उपमेय- जिसकी तुलना की जाती है अथवा जिसकी समता बताई जाती है, उसे उपमेय कहते हैं। जैसे-उपर्युक्त उदाहरण में नीलिमा की लतिका से तुलना की गई है, अतः नीलिमा उपमेय है।

(ख) उपमान- जिस वस्तु या व्यक्ति से उपमेय की तुलना की जाती है अथवा उपमेय को जिसके समान बताया जाता है, उपमान कहलाता है। यहाँ नीलिमा (उपमेय) की लतिका से तुलना की गई है, अतः यहाँ लतिका उपमान है।

(ग) समान/साधारण/सामान्य धर्म- जो गुण या विशेषता उपमेय और उपमान दोनों में समान है, उस विशेषता को प्रकट करने वाले शब्द को समान धर्म या साधारण धर्म अथवा सामान्य धर्म कहते हैं। उपर्युक्त उदाहरण में ‘तन्वंगी’ शब्द (इकहरा और लहरीलापन) नीलिमा के शरीर और लतिका में मिलने वाले समान गुण या विशेषता को बताता है। अतः यहाँ तन्वंगी’ समान या सामान्य धर्म है।

(घ) वाचक शब्द- जिस शब्द की सहायता से उपमेय और उपमान की तुलना की जाती है, उसे वाचक शब्द कहते हैं। जैसे-उपर्युक्त उदाहरण में ‘सी’ शब्द दोनों के सादृश्य को बताता है, अतः यह वाचक पद है।

किसी भी काव्य पंक्ति में उपमा के इन चारों तत्त्वों के होने पर पूर्णोपमा’ और इनमें मी एक तत्त्व के न होने पर ‘लुप्तोपमा’ नाम से ‘उपमा अलंकार’ के दो भेद हैं

(1) पर्णोपमा- जहाँ उपमेय और उपमान में सादृश्य प्रकट करने वाले चारों अंगों नचों को बताने वाले शब्दों का प्रयोग हो, वहाँ पूर्णोपमा अलंकार होता है। जैसे-पीपर पात सरिस मन डोला

उपर्युक्त पंक्ति में मन उपमेय, पीपरपात उपमान, डोला सामान्य धर्म तथा सरिस वाचक शब्द है।

अतः यहाँ उपमा के चारों तत्त्वों के विद्यमान होने के कारण पूर्णोपमा अलंकार है। अन्य उदाहरण-हाय फूल-सी कोमल बच्ची।

हुई राख की थी ढेरी।। यहाँ फूल उपमय, बच्ची उपमान, कोमल सामान्य धर्म और सी वाचक शब्द हैं। अतः यहाँ पूर्णोपमा अलंकार है।

(ii) लुप्तोपमा –उपमा के चारों अंगों व तत्त्वों में से किसी एक के लोप हो जाने अर्थात् उसके लिए शब्द का प्रयाग न होने के कारण लुप्तोपमा अलंकार हो जाता है। जैसे

अरविद से शिशबंद कैसे सो रहे?

उपर्युक्त पंक्ति में शिशुवृंद (उपमेय), अरविंद (उपमान) तथा सो रहे (वाचक | शब्द) हैं। परन्तु यहाँ सामान्य धर्म नहीं है। अस्तु यहाँ लुप्तोपमा अलंकार है।

अन्य उदाहरण–राधा मुख पूनो के चाँद समान।

उपर्युक्त उदाहरण में राधामुख (उपमेय), चाँद (उपमान), समान (वाचक शब्द) तो । हैं, परन्तु चाँद के समान कैसा? अर्थात् दोनों में मिलने वाले गण का कथन (सामान्य धर्म) नहीं है। अतः यहाँ लुप्तोपमा अलंकार है।

उपमा के अन्य उदाहरण हैं–

(क) नीलगगन-सा शान्त हृदय था रो रहा।

(ख) हरिपद कोमल कमल से ।

(ग) मुख बाल-रवि-सम लाल होकर ज्वाला-सा बोधित हुआ।

2. रूपक अलंकार Alankar In Hindi

परिभाषा- जहाँ बहुत समानता के कारण उपमेय और उपमान में एकरूपता दिखाई देती है, वहाँ रूपक अलंकार होता है। अत्यधिक समानता के कारण उपमेय और उपमान में अन्तर न बताकर उपमेय को ही उपमान कह दिया जाता है। जैसे –

”चरण-कमल बन्दौ हरि राई”

यहाँ चरण (उपमेय) और कमल (उपमान) में कोई अन्तर नहीं किया गया है.अर्थात दोनों में एकरूपता दिखाई गई है। अतः यहाँ रूपक अलंकार है।

अन्य उदाहरण हैं-

(क) आए महंत बसंत। उपर्युक्त पद में ‘बसंत पर महंत’ का आरोप होने से रूपक अलंकार है।

(ख) मैया में तो चन्द्र खिलौना लहों।

इस पंक्ति में चन्द्रमा (उपमेय) में खिलौना (उपमान) का आरोप होने से रूपक अलंकार है।

उत्प्रेक्षा अलंकार Alankar In Hindi

परिभाषा- जहाँ उपमेय और उपमान के भिन्न होते हुए भी उनमें समानता की। सम्भावना की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इसमें न तुलना होती है, न अभेद आरोप, बल्कि कहा जाता है कि ऐसा मान लो या कल्पना कर लो। इसमें मनो, मानो, मन्, जानो, जनहूँ, मनहूँ आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

जैसे- उसका मारे क्रोध के तन काँपने लगा। मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा।।

उपर्युक्त पंक्तियों में क्रोध से काँपते शरीर को तूफानी समुद्र मान लेने की बात की गई है। अस्तु, यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।

अन्य उदाहरण

(क) मुख मानो चन्द्र है।

उपर्युक्त पद में मुख में चन्द्रमा की सम्भावना की गई है। अतः यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।

(ख) कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।

हिम के कणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।

उपर्युक्त पद में ‘उत्तरा के अश्रुपूर्ण नेत्रों’ (उपमेय) में ‘ओस जल-कण युक्त पंकज’ (उपमान) की सम्भावना की गई है। अस्तु, यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।

अतिशयोक्ति अलंकार

परिभाषा- जहाँ किसी कार्य, वस्तु या बात का लोक सीमा से बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया जाता है, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है।

बढा-चढाकर कहने से अभिप्राय यह है कि साधारण रूप से लोक या जीवन में वस्तु जैसी है अथवा जो कार्य जिस ढंग से होता है व जो बात जैसी भी कही जाती है उससे अधिक सुन्दर, बड़ा या छोटापन या बात में तेजी आदि उसमें वर्णन कर दी जाती हैं। जैसे

देख लो साकेत नगरी है यही,

स्वर्ग से मिलने गगन को जा रही।

यहाँ साकेत नगरी के भवनों की ऊंचाई का एक सीमा से अधिक बटाटा वर्णन किया गया है। अतः यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है।

अन्य उदाहरण हैं

(क) आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार।

राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार ।। उपर्युक्त पद में चेतक की तीव्र गति का बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया गया है। सोचने की क्रिया पूर्ण होने से पहले ही घोड़े (चेतक) का नदी के पार पहुंचना लोक सीमा का अतिक्रमण है। अतः यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है। (ख) हनूमान की पूंछ में लगन न पाई आग।

लंका सगरी जलि गई, गए निशाचर भाग।।

उपर्युक्त पद में कारण अभी हुआ नहीं अर्थात् आग अभी लगी नहीं कि सारी लंका के जल जाने का कार्य पूर्ण हो गया अर्थात् लंका जल गई। अतः यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है।

अन्योक्ति अलंकार Alankar In Hindi

परिभाषा- जहाँ उपमान के वर्णन के माध्यम से उपमेय का वर्णन होता है, वहाँ अन्योक्ति अलंकार होता है। इसमें अप्रस्तुत (उपमान) के माध्यम से प्रस्तुत (उपमेय) का वर्णन होता है। अतः इस अलंकार को अप्रस्तुत प्रशंसा अलंकार भी कहते हैं। जैसे-

स्वारथ सुकृत न स्रम वृथा, देखु विहंग विचारि। बाज पराए पानि पर तू पंछीउ न मारि।।

उपर्युक्त दोहे में बाज (उपमान) के माध्यम से राजा मानसिंह (उपमेय) को सम्बोधन किया गया है। अतः यहाँ अन्योक्ति अलंकार है।

अन्य उदाहरण हैजिन दिन देखे वे कुसुम, गई सु बीति बहार । अब अलि रही गुलाब में, अपत कँटीली डार।।

उपर्युक्त पद में गुलाब और भौरे (उपमान) के माध्यम से आश्रित कवि और आश्रयदाता राजा (उपमेय) की प्रतीति होने से यहाँ अन्योक्ति अलंकार है।

आज आपनेAlankar In Hindi के बारे में सीखा

आपने जाना Alankar In Hindi के बारे में अलंकार कितने प्रकार के होते हैं अलंकार की परिभाषा क्या होती है अलंकार के भेद और अलंकार के उदाहरण हमने आपको अच्छी तरीके से समझाने की कोशिश की है यदि आपका कोई क्वेश्चन है तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करें हम उसका उत्तर आवश्यक देंगे |

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