Hindi Varnamala- जानिए हिंदी वर्णमाला स्वर और व्यंजन

Hindi Varnamala : जैसा कि आप सब जानते हैं कि हिंदी भाषा का इतिहास इस विश्व में अधिक पुराना है लेकिन हिंदी भाषा में भी व्याकरण का समावेश पाया जाता है वैसे तो हिंदी भाषा के व्याकरण में अनेक भाग होते हैं लेकिन आज हम आपको हिंदी वर्णमाला के बारे में सं

Hindi Varnamala

वर्ण विचार- Hindi Varnamala

Hindi Varnamala विश्व की प्रत्येक भाषा में मूल ध्वनि को प्रकट करने के लिए चिन की आवश्यकता होती है। उस चिह्न को ही वर्ण कहते हैं। ये वर्ण निश्चित अर्थ को प्रकट करते हैं। प्रत्येक भाषा के वर्ण भिन्न-भिन्न होते हैं। इसी कारण प्रत्येक भाषा (हिन्दी, सिन्धी, फारसी, अंग्रेजी, बँगला, उर्दू, तमिल, मलयालम, फ्रेंच, चीनी, जर्मन)  आदि का पृथक्-पृथक् अस्तित्व है।

वर्ण की परिभाषा

हिन्दी भाषा में प्रयुक्त सबसे छोटी ध्वनि, जिसके और खण्ड न हो सकें, वर्ण कहलाती है। जैसे-अ, आ, इ, ई, उ, ओ, क्, च्, ट्, त्, प, ल, श आदि। ये हिन्दी में 48 हैं। इनकी सहायता से अनेक शब्दों का निर्माण होता है। इनका कथित (मौखिक) भाषा और लिखित भाषा में विशेष महत्त्व है।

हिन्दी वर्णमाला -Hindi Varnamala

मन में उठने वाले विचारों को प्रकट करने के लिए हमारे मुख से धनिया निकलती है इन ध्वनियों को विशेष चिन्हों के रूप में कागज पर अंकित कर लिया जाता है मूल ध्वनियो का यह लिपिबद्ध य रूप ही वर्ण कहलाता है किसी भाषा के समस्त वर्णों का व्यवस्थित व क्रमबद्ध समूह वर्णमाला कहलाता है

समझिए

जल। ‘जल’ शब्द दो वणों से बना है-ज, ल। परंतु ये ‘जल’ शब्द में निहित मूल ध्वनियाँ नहीं हैं। ‘ज’ में ‘ज् + अ’ तथा ‘ल’ में ‘ल + अ’ दो-दो ध्वनियाँ निहित हैं। अब इन ध्वनियों के और खंड नहीं किए जा सकते।

परिभाषा:- भाषा की मूल ध्वनियों को व्यक्त करने वाले ऐसे चिह्नों को, जिनके खंड न किए जा सकें, (वर्ण) कहते हैं; जैसे-अ, इ, क, ख, च, व आदि।

अन्य उदाहरण

मूल ध्वनियाँ

कमल = क् + अ + म् + अ + ल्

नमक  = न् + अ + म् + अ + क्

केला = क् + ए + ल् + आ

शरबत = श् + अ + र् + अ + ब्

ये सभी भाषा की मूल ध्वनियाँ हैं, इनके और खंड नहीं किए जा सकते। ये वर्ण हैं।

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हिंदी वर्णमाला स्वर और व्यंजन- Hindi Varnamala

वर्णों के क्रमबद्ध समूह को वर्णमाला कहते हैं। उच्चारण और प्रयोग के आधार पर हिन्दी वर्णमाला के दो भेद किए गए हैं

वर्णमाला के दो भाग होते हैं :-

1. स्वर
2. व्यंजन

1. स्वर – Vowel

जिन वर्णों को स्वतंत्र रूप से बोला जा सके उसे स्वर कहते हैं। परम्परागत रूप से स्वरों की संख्या 13 मानी गई है लेकिन उच्चारण की दृष्टि से 10 ही स्वर होते हैं।

1. उच्चारण के आधार पर स्वर :
अ, आ , इ , ई , उ , ऊ , ए , ऐ , ओ , औ आदि।

2. लेखन के आधार पर स्वर :-
अ, आ, इ , ई , उ , ऊ , ए , ऐ , ओ , औ , अं , अ: , ऋ आदि।

 

2. व्यंजन- Dishes

जो वर्ण स्वरों की सहायता से बोले जाते हैं उन्हें व्यंजन कहते हैं। हर व्यंजन के उच्चारण में अ स्वर लगा होता है। अ के बिना व्यंजन का उच्चारण नहीं हो सकता। वर्णमाला में कुल 35 व्यंजन होते हैं।

कवर्ग : क , ख , ग , घ , ङ
चवर्ग : च , छ , ज , झ , ञ
टवर्ग : ट , ठ , ड , ढ , ण ( ड़ ढ़ )
तवर्ग : त , थ , द , ध , न
पवर्ग : प , फ , ब , भ , म
अंतस्थ : य , र , ल , व्
उष्म : श , ष , स , ह
संयुक्त व्यंजन : क्ष , त्र , ज्ञ , श्र

 

स्वर के भेद- Hindi Varnamala

स्वतंत्र रूप से बोले जाने वाले या बिना किसी दसरे वर्ण की सहायता से बोले जाने वाले वर्ण ‘स्वर’ कहलाते हैं।’
भाषा में स्वर वर्णों की संख्या 11 है- अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ। उच्चारण की दृष्टि से स्वरों के तीन भेद होते हैं-

1. ह्रस्व स्वर  2.दीर्घ स्वर  3.प्लुत स्वर

1. ह्रस्व स्वर (Short Vowels)

ह्रस्व स्वर का अर्थ है ‘छोटा’ अथवा ‘कम’। जिन स्वरों के उच्चारण में एक मात्रा का, अर्थात
समय लगता है, उन्हें ह्रस्व स्वर कहते हैं। अ, इ, उ, ऋ ये चार ह्रस्व स्वर हैं। ह्रस्व स्वर को मूल स्वर भी कहते हैं।

2. दीर्घ स्वर (Long Vowels)

दीर्घ का अर्थ है ‘बड़ा’ या अधिक’। जिन स्वरों के उच्चारण में हस्व स्वरों की तुलना में 3
अर्थात् दुगुना (दो मात्राओं का) समय लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं। ‘आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ’ कुल सात दीर्घ स्वर हैं।

| आ = अ+ अ | ई = इ + इ |ऊ = उ + उ| ए = अ + इ | ऐ = अ + ए| ओ = अ + उ| आ = अ+ओ| दीर्घ स्वरों को संधि स्वर भी कहा जाता है।

3. प्लुत स्वर (Longer Vowels)

प्लुत स्वरों के उच्चारण में दीर्घ स्वरों से अधिक समय लगता है। किसी को दूर से पुका
इनका प्रयोग देखा जा सकता है। प्लुत के लिए कोई सुनिश्चित संकेत-व्यवस्था नहीं है; केवल प्लुत दिखाने के लिए (३) चिह्न बना दिया जाता है; जैसे-ओ३म्।

विशेष- हम किसी भी स्वर (ह्रस्व अथवा दीघ) का प्रयोग प्लुत् स्वर के रूप में कर सकते हैं। आजकल (३) का प्रयोग लिखित रूप में नहीं किया जाता है।

ऑ ध्वनि“-उपर्युक्त 11 स्वरों के अतिरिक्त ‘ऑ ध्वनि‘ अंग्रेजी के डॉक्टर, हॉल, कॉलेज, ऑफिस आदि शब्दों में व्यवहृत होने लगी है। यह ‘आ’ और ‘ओ’ ध्वनियों की मध्यवर्ती है। इसका प्रयोग अंग्रेजी के कुछ शब्दों में ही मिलता है। बोलचाल में इस ध्वनि का प्रयोग ‘आ’ के समान ही किया जाता है। जैसे डाक्टर, बाल आदि। परन्तु कभी-कभी इसका ‘आ’ के समान उच्चारण उचित नहीं रहता। जैसे-हाल (हाल-चाल)-हॉल (एक बड़ा कमरा); काल (समय)-कॉल (बुलाना या पुकारना); बाल (बालक)-बॉल (गेंद) आदि।

स्वरों की मात्राएं

Hindi Varnamala जब कोई स्वर  व्यंजन से पहले प्रयुक्त होता है तो उसका रूप अपरिवर्तनीय रहता है परंतु व्यंजन के बाद आने वाले स्वर का रूप बदल जाता है इस बदले हुए रूप को मात्रा कहते हैं 

अ × कम

आ ा काम

इ ि किसलय

ई ी खीर

उ ु गुलाब

ऊ ू भूल

ऋ ृ तृण

ए े केश

ऐ ै है

ओ ो चोर

औ ौ चौखट

आज आपने Hindi Varnamala के बारे में सीखा

आपने जाना Hindi Varnamala के बारे में Hindi Varnamala In Hindi स्वर, व्यंजन कितने प्रकार की होती है | संज्ञा की परिभाषा क्या होती है स्वर के भेद और  व्यंजन हमने आपको अच्छी तरीके से समझाने की कोशिश की है यदि आपका कोई क्वेश्चन है तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करें हम उसका उत्तर आवश्यक देंगे |

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